लेखक-डॉ.के. विक्रम राव (लेखक IFWJ के नेशनल प्रेसिडेंट व वरिष्ठ पत्रकार/स्तंभकार हैं) Read more
लेखक-सुभाषचंद्र यह सब कुछ कोरोना काल में भी हुआ जब अलग अलग अदालतें वैश्विक संकट के समय केंद्र सरकार पर लट्ठ बजाती रहीं और कुछ जज अपशब्द तक बोलते रहे। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस वीपी सांघी ने तो यहां कह दिया था कि “चोरी करो, भीख मांगो या उधार लो मगर दिल्ली को ऑक्सीजन […] Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव अमेरिका का 35वां राष्ट्रपति। शहीद हुआ था।साम्राज्यवादी, शोषक अमेरिका में नई जनवादी रोशनी प्रज्वलित करने वाला आकर्षण यादगार था क्योंकि हम दोनों की जन्मगांठ 29 मई है। कैनेडी के दो सूत्र स्मरणीय रहेंगे : “मैं डर कर वार्ता नहीं करूंगा। मगर वार्ता करने से डरूँगा नहीं।” दूसरा अर्थ बड़ा उम्दा, सटीक था […] Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के कई अद्भुत और भू-डुलानेवाले चुनावी वादों के फलस्वरुप मतदाताओं को भी संभावित क्रांति का आभास तो हो ही गया। मसलन मिलेई ने कहा था कि अर्जेंटीना की मुद्रा पेसो की जगह अमेरिकी डॉलर का चलन होगा, ताकि दाम कम हो सकें। जननेताओं के भ्रष्टाचार से पेसो की विनिमय दर […] Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव (लेखक IFWJ के नेशनल प्रेसिडेंट व वरिष्ठ/पत्रकार स्तंभकार हैं) Read more