लेखक -डॉ.के. विक्रम राव छः दशक बीते। लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. जीएन धवन और प्रोफेसर पीएन मसालदान ने मुझे एम.ए. में पढ़ाया था कि हर गणराज्य की विदेश नीति सार्वभौम और स्वतंत्र होनी चाहिए। फिर “टाइम्स आफ इंडिया” में सात प्रदेशों में संवाददाता का काम करते मैंने पाया कि आंचलिक सियासी […] Read more
लेखक -डॉ.के. विक्रम राव (लेखक IFWJ के नेशनल प्रेसिडेंट व वरिष्ठ पत्रकार/स्तंभकार हैं) Read more
(मुकेश सेठ)(मुम्बई) WFMH द्वारा वर्ष 2023 में’ मानसिक स्वास्थ्य एकसार्वभौमिक अधिकार है’ को बनाया है थीम ,बताया सुप्रसिद्ध मनोचिकित्सक ने विश्व में हर 40 सेकेंड में डिप्रेशन की वजह से तनावग्रस्त लोग कर रहे सुसाइड वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ़ मेंटल हेल्थ (WFMH) द्वारा इस साल विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2023 की थीम ‘मानसिक स्वास्थ्य एक सार्वभौमिक […] Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव (लेखक IFWJ के नेशनल प्रेसिडेंट व वरिष्ठ पत्रकार/स्तंभकार हैं) Read more
लेखक-अरविंद जयतिलक सैकड़ों साल बाद भारतीय समाज का स्वरुप, चरित्र एवं चिंतन की व्याख्या का दायरा और उसके मूल्यों को मापने व परखने का मापदण्ड क्या होगा उसकी भविष्यवाणी आज संभव नहीं है। इसलिए कि राजाराम मोहनराय, ईश्वरचंद विद्यासागर, स्वामी दयानंद सरस्वती, विवेकानंद, गांधी, लोहिया और अंबेडकर जैसे समाज सुधारकों-मनीषियों के सामाजिक अवदानों एवं नैतिक […] Read more