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लेखक:डॉ.के. विक्रम राव

नरेंद्र मोदी के प्रिय सखा और सोशलिस्ट नेता एंथनी अल्बानीज़ ऑस्ट्रेलिया के दुबारा प्रधानमंत्री आज चुने गए हैं। अमीर ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप का यह 62-वर्षीय राजनेता भी अपनी मां के प्रिय हैं, जैसे मोदी रहे। इसके एक मायने यह लगाए जा सकते हैं कि मातृभक्ति राजनीति में बड़ी मददगार है।

दो वर्ष पूर्व (24 मई 2023) की बात है। जब कई हिंदू मंदिरों पर खालिस्तानी उग्रवादियों ने हमला किया था। उसी दौर में भारतीय प्रधानमंत्री ने मंदिरों की रक्षा का मुद्दा उठाया था। मोदी तब ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थे। खलिस्तानी उग्रवादियों ने कैरम डाउंस के विष्णु मंदिर, ब्रिसबेन के लक्ष्मी नारायण मंदिर, मिल पार्क के इस्कान मंदिर आदि को क्षति पहुंचायी। मोदी ने कहा : “प्रधानमंत्री अल्बनीज और मैंने पहले भी ऑस्ट्रेलिया में मंदिरों पर हमले और अलगाववादी तत्वों की गतिविधियों के मुद्दे पर चर्चा की थी। हमने आज भी इस मामले पर चर्चा की।” ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने उन्हें इस तरह की तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।”

भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों के बारे में विशेष है कि दोनों कभी आपस में नहीं भिड़ते हैं, सिवाय क्रिकेट के मैदान के। मगर आज IPL खेल में यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर भारतीय खिलाड़ियों के साथ उनके लिए खेल रहे हैं। मसलन विराट कोहली के रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए जोश हेजलवुड, टिम डेविड, फिल्म अभिनेत्री प्रीति जिंटा की पंजाब किंग्स के लिए मार्क स्टोइनिस, ग्लेन मैक्सवेल, जोश इंग्लिस, आरोन हार्डी और जावियर बार्लेट खेल रहे हैं और उद्योगपति संजीव गोयनका के स्वामित्व वाली लखनऊ सुपरजाइंट्स के लिए मिचेल मार्श हैं। इसके अलावा चार और ऑस्ट्रेलियायी क्रिकेटर भी खेल रहे हैं।

मोदी की दो वर्ष पूर्व की यात्रा का एक तुलनात्मक महत्व भी रहा। राजीव गांधी 1986 में ऑस्ट्रेलिया गए थे। उनके बाद चार दशकों में भारत के सात प्रधानमंत्री हुए मगर कोई भी ऑस्ट्रेलिया नहीं गया। इसीलिए मोदी ने अपनी यात्रा पर घोषणा की थी “अगले भारतीय प्रधानमंत्री के आगमन हेतु अब आपको 28 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।” उन्होंने अलविदा नहीं कहा, फिर भेंट का प्रण जाहिर किया।

उसी दौरे में नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण खोज रही सोने की खदानों से भरा शहर “लखनऊ”। उपलब्ध दस्तावेजों में जिक्र है किसी मिस्टर रे का जो 1857 में लखनऊ में ईस्ट इंडिया कंपनी में प्रशासनिक अधिकारी थे। विद्रोह के बाद वे घायल अवस्था में ऑरेंज प्रदेश (ऑस्ट्रेलिया) आकर बस गए। उन्हीं ने सिडनी से ढाई सौ किलोमीटर दूर की इस बस्ती को लखनऊ का नाम दिया। यहां मात्र 300 परिवार बसे हैं। इतिहासकार कुक ने अपनी किताब “लखनऊः ए वेरिटेबल गोल्डमाइन” में इसे भारत के लखनऊ से संपर्क होने का जिक्र किया है।

आज मोदी द्वारा अपने मित्र अल्बानीज़ को बधाई देने के सिलसिले में पिछली यात्रा के निर्णय की याद भी आई। तब पूर्वी पर्थ नगर में नेल्सन एवेन्यू का नाम बदलकर “नारायण सिंह सैलानी मार्ग” कर दिया गया। यह सिख जवान प्रथम विश्व युद्ध (1917) के दौरान ऑस्ट्रेलिया की रक्षा में शहीद हुआ था। मोदी के अनुरोध पर यह नामकरण किया गया। ब्रिटेन के नौसेनाध्यक्ष एडमिल होरेशियो नेल्सन ने फ्रांस के सम्राट नेपोलियन बोनपर्ट को ट्राफ्लागार सागरी युद्ध में हराया था (21 अक्टूबर 1805)। उस महान सेनापति का नाम हटाकर इसे एक सिख जवान के नाम कर दिया गया। मोदी ने कहा भी कि ब्रिंघम स्ट्रीट को विक्रम मार्ग, हैरिस पार्टी को हरीश उद्यान, पारमिट्टा स्क्वायड को परमात्मा चौक भी भारतीयों ने कर दिया है।

आज-चीन समर्थित पाकिस्तान से युद्ध की आशंका के सिलसिले में प्रधानमंत्री अल्बानीज़ अपने भारतीय मित्र के साथ खड़े हैं।

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(लेखक IFWJ के नेशनल प्रेसिडेंट व वरिष्ठ पत्रकार/स्तंभकार हैं)

By Mukesh Seth

Chief Editor

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