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(मुंबई सेठ)
(मुंबई)

फिल्म में 2001 की गैंगरेप के दौरान“एक-एक करके जाओ वरना मेरी बेटी मर जाएगी” बेटी के साथ सामूहिक ब्लात्कार पर एक माँ की चित्कार कर देगी रौंगटे खड़े

३० अगस्त को रिलीज होने वाली इस फिल्म में बांग्लादेश मे हुए उथल पुथल की घटनाओं को भी देखा जा सकता है कहा निर्माता नें

एक साहसिक कदम उठाते हुए, निर्माता वसीम रिज़वी और निर्देशक सनोज मिश्रा ने अपनी नवीनतम फिल्म, “द डायरी ऑफ़ वेस्ट बंगाल” के साथ रोहिंग्या संकट की अनकही कहानियों को सिल्वर स्क्रीन पर पेश करने जा रहे है।

नायक की भूमिका में अश्मीन मेहता और नायिका की भूमिका अदा करने वाली यजुर मारवाह अभिनीत यह फिल्म आगामी 30 अगस्त को दुनिया भर में रिलीज़ होने जा रही है।

यह फिल्म बांग्लादेश में 2001 की क्रूर घटना सहित संवेदनशील विषयों को साहसपूर्वक उठाती है, जहाँ अवैध अप्रवास की सुविधा देने वाले व्यक्तियों द्वारा एक नाबालिग लड़की का बलात्कार किया गया था। बांग्लादेश की विश्व प्रसिद्ध लेखिका तस्लीमा नसरीन की किताब “लज्जा” में वर्णित लड़की की माँ की बलात्कारीयो से यह दर्दनाक अपील कि “एक-एक करके जाओ, नहीं तो मेरी बेटी मर जाएगी” ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया और तसलीमा नसरीन को भी इसका खामियाजा भूगतना पड़ा था, जिसके चलते उन्हें तुरंत बांग्लादेश से भागना पड़ा।

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फिल्म के निर्माता उत्तर प्रदेश के शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी हैं जिन्होंने अपना मजहब बदल कर हिंदू होकर जितेंद्र त्यागी बन चुके हैं।
त्यागी ने इसके पहले भी देश के ज्वलंत मुद्दे पर कई फ़िल्म बनाई है जिस पर उन्हे कट्टरपंथियो ने निशाने पर ले रखा है पाकिस्तान से दाऊद इब्राहिम गैंग द्वारा कुछ वर्ष पूर्व उन्हे जान से मारने की धमकी भी दी जा चुकी है।

फिल्म निर्माता वसीम रिजवी उर्फ़ जीतेंद्र त्यागी कहते हैं कि “पश्चिम बंगाल की डायरी” फिल्म बांग्लादेश में मौजूदा उथल-पुथल पर भी प्रकाश डालती है। देश में हिंसक विरोध, राजनीतिक उथल-पुथल और मानवीय संकट के कारण काफी अशांति है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में पुलिस अधिकारियों सहित 170 से अधिक लोग मारे गए हैं। सरकार ने अशांति को शांत करने के लिए कर्फ्यू लगा दिया है और इंटरनेट एक्सेस को प्रतिबंधित कर दिया।
प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्ता पलट किये जाने और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाए जाने के बाद हिंसा बढ़ गई है।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने बल के अत्यधिक प्रयोग और शांतिपूर्ण विरोध के दमन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इस कार्रवाई के कारण कई लोगों की मृत्यु हुई, लोगों को जबरन गायब किया गया और पत्रकारों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया।

पश्चिम बंगाल की डायरी रोहिंग्या की दुर्दशा और बांग्लादेश में व्यापक सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों का एक सशक्त चित्रण होने का वादा करती है। इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और चल रहे मानवीय संकट के बारे में महत्वपूर्ण बातचीत को बढ़ावा देना है।

By Mukesh Seth

Chief Editor

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