लेखक-अरविंद जयतिलक
♂÷अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को स्वस्थ और समावेशी समुद्री इकोसिस्टम के संरक्षण और समर्थन की दिशा में ठोस कार्रवाई के लिए आयोजित वन ओशन शिखर सम्मेलन कई मायने में महत्वपूर्ण रहा। इसलिए और भी कि भारत समेत दुनिया की कई सभ्यताएं महासागरों से जुड़ी हुई हैं और सभी ने प्रतिबद्धता जतायी है कि वे टिकाऊ महासागर और समुद्रों को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए दृढ़संकल्पित हैं। गौरतलब है कि इस सम्मेलन का आयोजन फ्रांस द्वारा संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक के सहयोग से फ्रांस के ब्रेस्ट में किया गया जिसके उच्चस्तरीय सत्र को जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया, जापान और कनाडा सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने संबोधित किया। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महासागर और समुद्रों के प्रदूषण को कम करने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सुरक्षा और समृद्धि महासागरों से जुड़ी हुई है। ऐसे में ‘इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशएटिव’ का प्रमुख स्तंभ समुद्री संसाधन है जिसका संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने दुनिया को भरोसा भी दिया कि भारत सिंगल यूज प्लास्टिक को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और भारतीय नौसेना को समुद्र से प्लास्टिक कचरे को साफ करने के लिए इस वर्ष 100 दिन दिए गए हैं। दो राय नहीं कि इस वैश्विक पहल से महासागर और समुद्रों का प्रदूषण खत्म होगा और स्वास्थ सुधरेगा। यह तथ्य है कि महासागर और समुद्र तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं जिसका प्रतिकूल असर जैव विविधता को गहरे संकट में डाल रहा है। अभी गत वर्ष पहले ही स्पेन के वैज्ञानिकों ने खुलासा किया था कि जीवाश्म ईंधन का उपयोग, औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन और जंगल की आग इत्यादि से समुद्री जीवन जहरीला बन रहा है। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि इनसे उत्सर्जित पाॅलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन्स (पीएएचएस) नामक घातक रसायन की मात्रा समुद्र में लगातार बढ़ रही है और समुद्री जीवों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि इसके पीछे 90,000 टन पीएएचएस का उत्सर्जित होना है। उल्लेखनीय है कि पीएएचएस सौ से अधिक घातक रसायनों का समूह होता है, जो कि जीवाश्म ईंधन और लकड़ी के जलने से वातावरण में उत्सर्जित होता है। इन्हें जानलेवा प्रदूषक तत्वों की श्रेणी में रखा गया है। स्पेन के वैज्ञानिकों ने बायो हेस्पिराइट्स नाम समुद्री शोध जहाज से ब्राजील, अफ्रीका, आस्टेªलिया और हवाई द्वीप समेत कई देशों की समुद्री यात्रा कर इन्हें आंकड़ों में सहेजा है। जांच में टीम को 64 पाॅलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन्स मिले हैं जो अटलांटिक, प्रशांत और हिंद महासागर में पाए गए। इनमें से कुछ अत्यंत विषैले हैं जो समुद्र को जहरीला बनाने का काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि 2010 में मैक्सिको की खाड़ी में एक लाख वर्ग किलोमीटर से भी बड़े समुद्री क्षेत्र में तेल के कुएं से रिसाव हुआ। उसमें करीब 50 लाख बैरल तेल समुद्र में बह गया। 1967 में टाॅरी कैन्यन नाम के आॅयल टैंकर के दुर्घनागस्त हो जाने और 1967 में ही कैलिफोर्निया के तटीय इलाके में सैंटा बारबरा के तेल रिसाव की घटना भी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर चुकी है। तेल रिसाव के घातक परिणाम समुद्री जीवों के लिए खतरनाक है। यह तथ्य भी सामने आ रहा है कि मालवाहक जहाजों द्वारा जानबूझकर अवैध कचरे यानी कूड़ा-कबार समुद्र में छोड़ा जा रहा है। जबकि विदेशी और घरेलू नियमों के तहत ऐसे कार्य प्रतिबंधित हैं। एक अनुमान के मुताबिक कंटेनर ढ़ोने वाल मालवाहक जहाज तूफानों के दौरान हर वर्ष समुद्र में दस हजार ज्यादा कंटेनर खो देते हैं और उनमें लदा तेल समुद्री जीवों के जीवन पर भारी पड़ता है। तेल रिसाव के अलावा जहाज ध्वनि प्रदूषण भी फैलाते हैं जिससे जीव-जंतु परेशान होते हैं। इसके अलावा स्थिरक टैंकों से निकलने वाला पानी भी हानिकारण शैवाल एवं अन्य तेजी से पनपने वाली आक्रामक प्रजातियों को फैलाने में मददगार साबित होता है। एक अन्य शोध में यह भी दावा किया गया है कि प्रशांत महासागर के एक बड़े क्षेत्र के समुद्री जल में आॅक्सीजन की मात्रा लगातार घट रही है। यह शोध जार्जिया इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी के शोधकर्ताओं ने किया है। इसके पीछे भी एशियाई क्षेत्र से उत्पन वायु प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया गया है। गहरे समुद्र में यह संकट अधिक तेजी से बढ़ रहा है जिससे समुद्री जीवन के लिए खतरा उत्पन हो गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्री प्रदूषण तब होता है जब रसायन, कण, औद्योगिक, कृषि रिहायशी कचरा या आक्रामक जीव समुद्र में प्रवेश करते हैं और हानिकारक प्रभाव उत्पन करते हैं। समुद्री पदूषण के अधिकांश स्रोत थल आधारित होते हैं। समुद्री प्रदूषण अकसर कृषि अपवाह या वायु प्रवाह से पैदा हुए कचरे जैसे अस्पष्ट से होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई सामथ्र्य जहरीले रसायन सुक्ष्मकणों से चिपक जाते हैं जिनका सेवन प्लवक और नितल जीव समूह जन्तू करते हैं, जिनमें से ज्यादतर तलछट या फिल्टर फीडर होते हैं। इस तरह जहरीले तत्व समुद्री पदार्थ क्रम में अधिक गाढ़े हो जाते हैं। कई कण भारी आॅक्सीजन का इस्तेमाल करते हुए रासायनिक क्रिया के जरिए मिश्रित होते हैं और इससे खाड़ियां आॅक्सीजन रहित हो जाती हैं। जब कीटनाशक समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में शामिल होते हैं तो वो समुद्री फूड वेब में बहुत जल्दी सोख लिए जाते हैं। एक बार फूड वेब में शामिल होने पर ये कीटनाशक उत्परिवर्तन और बीमारियों को अंजाम दे सकते है जो इंसानों के लिए भी हानिकारक हो सकता है। आमतौर पर समुद्र में प्रदूषण के तीन रास्ते हैं। एक, महासागरों में कचरे का सीधा छोड़ा जाना, दूसरा वर्षा के कारण नदी-नालों में अपवाह से और तीसरा वातावरण में छोड़े गए प्रदूषकों से। समुद्र में प्रदूषण के लिए सबसे आम रास्ता नदियां हैं। समुद्र में पानी का वाष्पीकरण सर्वाधिक होता है। संतुलन की बहाली महाद्वीपों पर बारिश के नदियों में प्रवेश और फिर समुद्र में वापस मिलने से होती है। उदाहरण के लिए न्यूयाॅर्क में हडसन और न्यूजर्सी में रैरीटेन जो स्टेटन द्वीप के उत्तरी और दक्षिणी सिरों में समुद्र में मिलती है जिससे समुद्र में प्राणी मंदप्लवक यानी कोपपाॅड के पारा प्रदूषण का मुख्य स्रोत है। फिल्टर-फीडिंग कोपपाॅड में सबसे ज्यादा मात्रा इन नदियों के मुखों में नहीं बल्कि 70 मील दक्षिण में एटलांटिक सिटी के नजदीक है क्योंकि पानी के तट के बिल्कुल नजदीक बहता है। इससे पहले कि प्लवक विषाणुओं का सेवन करे, कई दिन गुजर जाते हैं। अमूमन तय प्वाइंट प्रदूषण तब होता है जब प्रदूषण का इकलौता, स्पष्ट और स्थानीय स्रोत मौजूद हो। इसका उदाहरण समुद्रो में औद्योगिक कचरे और गंदगी का सीधे तौर पर छोड़ा जाना है। गौर करें तो इस तरह का प्रदूषण विकासशील देशों में ज्यादा देखने को मिलता है। प्रदूषक नदियों और सागरों में शहरी नालों और औद्योगिक कचरों के निस्सरण से सीधे प्रवेश करते हैं और कभी-कभी तो हानिकारक और जहरीले कचरे के रुप में भी। अंदरुनी भागों में तांबे, सोने इत्यादि का खनन भी समुद्री प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत है। ज्यादतर प्रदूषण महज मिट्टी से होता है जो नदियों के साथ बहते हुए समुद्र में प्रवेश करती है। हालांकि खनन के दौरान खनिजों के निस्सरण से कई समस्याएं उभरकर सामने आती हैं। गौर करें तो खनन का बहुत घटिया ट्रैक रिकार्ड है। उदाहरण के लिए अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी की मानें तो खनन ने पश्चिमी महाद्वीपीय अमेरिका में 40 फीसद से ज्यादा जलोत्सारण क्षेत्रों के नदी उद्गमों के हिस्से को प्रदूषित किया है और इस प्रदूषण का सर्वाधिक हिस्सा समुद्र में मिलता है। वातावरण में छोड़े गए प्रदूषकों से भी समुद्र प्रदूषित हो रहा है। मसलन कृषि से सतह का अपवाह, साथ शहरी अपवाह और सड़कों, इमारतों, बंदरगाहों और खाड़ियों के निर्माण से हुआ अपवाह कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस और खनिजों से लदे कणों और मिट्टी को अपने साथ ले जाता है। सड़कों और राजमार्गों से दूषित अपवाह तटीय इलाकों में जल प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें प्रवेश करने वाले 75 फीसद जहरीले रसायन, सड़कों, छतों, खेतों और अन्य विकसित भूमि से तूफानों के दौरान पहुंचते हैं। उचित होगा कि समुद्री प्रदूषण से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कानून बने और उस पर ईमानदारी से अमल हो।

÷लेखक राजनीतिक व सामाजिक विश्लेषक हैं÷






















