सनातन संस्कृति के संवाहक और यशस्वी नेतृत्व के प्रतीक नरेन्द्र मोदी

लेखक:मुकेश शर्मा

17 सितंबर 2025को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वां जन्मदिवस हैं। यह अवसर केवल एक व्यक्तित्व के जन्मदिन का उत्सव नहीं, बल्कि एक ऐसे नेतृत्व का सम्मान है, जिसने भारत को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और सनातन संस्कृति को पुनर्जागरण का नया स्वरूप प्रदान किया। अपने 11 वर्षों के कार्यकाल में, प्रधानमंत्री मोदी ने सनातन धर्म और संस्कृति के मूल्यों को न केवल संरक्षित किया, बल्कि उन्हें आधुनिक भारत की प्रगति के साथ जोड़कर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
सनातन संस्कृति, जो सहिष्णुता, समन्वय और आध्यात्मिकता का प्रतीक है, को पुनर्जनन देने में प्रधानमंत्री मोदी का योगदान अभूतपूर्व रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एवं महाकाल कॉरिडोर के भव्य निर्माण से लेकर राम मंदिर के पुनर्निर्माण तक, उनके नेतृत्व में सनातन धर्म के तीर्थस्थलों को न केवल पुनर्जनन मिला, बल्कि ये वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित हुए। काशी विश्वनाथ मंदिर के कॉरिडोर ने जहां विश्व भर के श्रद्धालुओं को आकर्षित किया, वहीं अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण सनातनियों के लिए आस्था और एकता का प्रतीक बना।
प्रधानमंत्री ने योग और आयुर्वेद जैसी प्राचीन भारतीय परंपराओं को वैश्विक मंच पर ले जाकर सनातन संस्कृति की शक्ति को प्रदर्शित किया।
2014 में उनके प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी, जिसने योग को विश्व स्तर पर एक आंदोलन का रूप दिया। आज, योग और आयुर्वेद न केवल स्वास्थ्य और कल्याण का साधन हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान के वैश्विक दूत भी हैं।
आदरणीय मोदी जी का नेतृत्व इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे आधुनिकता और परंपरा का समन्वय संभव है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का मंत्र उनके शासन का आधार रहा है, जो सनातन संस्कृति के सर्वं समावेशी दर्शन को प्रतिबिंबित करता है। उनकी नीतियों, जैसे स्वच्छ भारत अभियान, न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम है, बल्कि सनातन धर्म के ‘पवित्रता’ के सिद्धांत को भी मजबूत करता है।
उनके कार्यकाल में डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलें भारत को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ सनातन मूल्यों को भी प्रोत्साहित करती हैं। उदाहरण के लिए, आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण सनातन संस्कृति के स्वावलंबन और आत्मसम्मान के सिद्धांतों से प्रेरित है।
सनातन धर्म समानता और सामाजिक समरसता की बात करता है, और प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी नीतियों में समाहित किया है। चाहे वह उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब महिलाओं को सशक्त करना हो, जन-धन योजना के जरिए वंचित वर्गों को आर्थिक मुख्यधारा में शामिल करना हो, या फिर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान, उनके हर कदम में सनातन संस्कृति के समावेशी मूल्यों की झलक दिखती है।वैश्विक मंच पर सनातन संस्कृति का गौरवमोदी जी ने सनातन संस्कृति को विश्व पटल पर सम्मान दिलाया। चाहे वह संयुक्त राष्ट्र में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश हो या जी-20 जैसे मंचों पर भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन, उन्होंने सनातन दर्शन को वैश्विक कल्याण का आधार बनाया। उनकी विदेश नीति में सनातन संस्कृति के मूल्यों जैसे शांति, सहयोग और पर्यावरण संरक्षण को प्रमुखता दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस केवल एक व्यक्ति का उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने वाले नेतृत्व का उत्सव है। उनके कार्यकाल में भारत ने न केवल आर्थिक और सामाजिक प्रगति की, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूत किया। आज, जब हम उनका 75वां जन्मदिन मना रहे हैं, यह हमारे लिए एक अवसर है कि हम उनके योगदान को याद करें और सनातन संस्कृति के गौरव को और आगे ले जाने का संकल्प लें।

IMG 20250916 WA0010

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह उनके निजी विचार हैं)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top