(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)
उत्तर प्रदेश में सबसे पहले औद्योगिक विकास प्राधिकरण नोएडा के जन्म के ठीक पच्चीस वर्ष और एक सप्ताह बाद अस्तित्व में आने वाला यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण येड़ा पहले टेढ़ा यानी ताज एक्सप्रेस वे विकास प्राधिकरण था।2001 में इसकी स्थापना इसी नाम से हुई थी। कालांतर में राज्य सरकार ने इसे भी औद्योगिक विकास प्राधिकरण घोषित करते हुए इसका नाम भी बदल दिया।आज यह पूरे पच्चीस वर्ष का हो गया है। वर्तमान में यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा 12 हजार करोड़ रुपए बजट वाला प्राधिकरण भी है।इसके मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह दावा करते हैं कि चालू वित्त वर्ष में ही परिसंपत्तियों के आवंटन और अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाली धनराशि से पुनरीक्षित होकर बजट 15 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। क्या इस प्राधिकरण की पच्चीस वर्ष की लंबी यात्रा की यही उपलब्धि है?यह गौतमबुद्धनगर से लेकर आगरा तक पांच जनपदों में फैला हुआ प्राधिकरण है।इसके प्रथम चरण में गौतमबुद्धनगर में ही अभी तक विकास किया गया है।इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पिछले महीने प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन हो चुका है। तीन हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयों को भूखंड आवंटित किए गए हैं जिनमें एचसीएल फॉक्सकॉन के संयुक्त उपक्रम इंडिया चिप, न्यू हॉलेंड, एस्कॉर्ट कुबोटो जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने की ओर अग्रसर हैं। भिन्न भिन्न प्रकार के उद्योगों के आठ विशेष सेक्टर विकसित किए जा रहे हैं जिनमें मेडिकल डिवाइस पार्क भी है जो देश के तीन मेडिकल डिवाइस पार्कों में से एक है। योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि का फूड पार्क भी यहां स्थापित हो रहा है। एक दर्जन से अधिक विश्वविद्यालय तथा जापानी व सिंगापुर सिटी भी इसी प्रथम चरण में बनने वाले हैं।
दरअसल यह एक ऐसा प्राधिकरण है जो नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसा होकर भी उनसे अलग है। इसका विकास क्षेत्र एक और ग्रेटर नोएडा से संपृक्त है तो दूसरी ओर आगरा जैसे ऐतिहासिक महानगर से। इस बीच में आध्यात्मिक नगरी मथुरा भी है। अलीगढ़ भी अपने ऐतिहासिक, शैक्षिक और औद्योगिक महत्व के लिए जाना जाता है। पच्चीस बरस में कोई भी प्राधिकरण भली प्रकार स्थापित हो जाता है परंतु यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण अभी भी विकास के मामले में रास्ते में है। पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ अरुणवीर सिंह और वर्तमान सीईओ राकेश कुमार सिंह ने इस प्राधिकरण को वास्तविकता के धरातल पर उतारने के लिए भागीरथ प्रयास किए हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे इसकी जीवन रेखा है जिसके दोनों ओर 165 किलोमीटर लंबाई में इस प्राधिकरण को कई क्षेत्र विकसित करने हैं। प्रथम चरण को ही पूरी तरह बसने में अभी दस वर्ष लग सकते हैं। सीईओ राकेश कुमार सिंह का कहना है कि अब यह प्राधिकरण उड़ान भरने ही वाला है जब आने वाले एक से दो वर्षों में यहां लगभग एक हजार औद्योगिक इकाइयां बनकर खड़ी हो जाएंगी। इनसे न केवल निवेश आएगा बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों का मूल उद्देश्य भी यही है।



