(संजय राय)
(नई दिल्ली)
कमला नेहरू कॉलेज में ‘मानवता के लिए श्रीरामचरितमानस’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित
कमला नेहरू कॉलेज के हिंदी विभाग एवं ‘संस्कृति संस्थान’ के संयुक्त तत्वावधान में ‘मानवता के लिए श्रीरामचरितमानस’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने श्रीरामचरितमानस के मानवीय मूल्यों, सकारात्मक मानसिक ऊर्जा और सामाजिक समरसता में इसकी भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
संस्कृति संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंघल ने कहा कि श्रीरामचरितमानस एक ऐसा महाकाव्य है, जो हर युग में प्रासंगिक है। पुरातन युग में ऋषि-मुनियों अथवा आज की जेन-जी पीढ़ी, सभी के लिए मानस एक औषधि के समान है। श्रीरामचरितमानस चरित्र-निर्माण, शील एवं व्यक्तित्व-विकास के साथ-साथ पारिवारिक व्यवस्था में समन्वय और प्रेम बनाए रखने के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक है।
प्रो. वर्मा ने शबरी और निषादराज के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि राम का जुड़ाव समाज के सभी संघर्षशील एवं वंचित समुदायों से था। उन्होंने रामकथा से संबंधित अनेक रचनाओं का उल्लेख किया, जिनमें मेघशिरण गुप्त की ‘साकेत’ और प्रेमचंद की ‘रामचर्चा’ प्रमुख हैं। दक्षिण एशिया के सूफी एवं शास्त्रीय गायकों की गायकी के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने ‘मेरा पिया घर आया, ओ राम जी’ गीत का उल्लेख किया।
संगोष्ठी का आयोजन कमला नेहरू कॉलेज में तुलसी जयंती के अवसर पर किया गया था। इस अवसर पर छात्रों के मध्य रामचरितमानस दोहा गायन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। प्रतियोगिता में हिंदी साहित्य परिषद की छात्राओं प्राति पन्त एवं भानु प्रिया ने भाग लिया। कार्यक्रम का आरंभ मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलगीत तथा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान संयोजक डॉ. अनुराग गुप्ता, डॉ. मनोज कुमार सहित हिंदी, संस्कृत एवं अन्य विभागों के गणमान्य शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग के प्रमुख डॉ. मनोज कुमार ने सभी वक्ताओं एवं छात्र-छात्राओं को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के समापन पर छात्राओं ने मानस की चौपाइयों का सामूहिक गायन किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ।




