(संजय राय)
(नई दिल्ली)
नेपाल भारत वर्ल्ड डेवलपमेंट फ़ोरम के तत्वाधान में बुद्धिजीवियों के बीच “नेपाल में नोटबंदी की आवश्यकता और औचित्य” पर हुआ विचार-विमर्श
नेपाल–भारत वर्ल्ड डेवलपमेंट फोरम के तत्वावधान में कल काठमांडू में “नेपाल में नोटबंदी की आवश्यकता और औचित्य” विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता फोरम के केन्द्रीय अध्यक्ष मधुरेंद्र चौधरी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत में अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक मिनट का मौन रखकर की गई।
फोरम के अध्यक्ष मधुरेंद्र चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि नेपाल में नोटबंदी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे भ्रष्टाचार उजागर होगा और छिपा हुआ धन बाहर आएगा। उनके अनुसार, “नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था शुद्ध होगी और विकास के नए द्वार खुलेंगे।” उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में नोटबंदी के बाद बड़ी मात्रा में नकदी बैंकिंग प्रणाली में आई और इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।

चौधरी ने आगे कहा कि नेपाल दो शक्तिशाली देशों के बीच स्थित होने के बावजूद विकास में पिछड़ रहा है, जिसका मुख्य कारण गहराता भ्रष्टाचार है। “इसे जड़ से समाप्त करने के लिए नोटबंदी एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग ओबीसी के अध्यक्ष कौशल कुमार सिंह ने एक कार्यपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जेन-जी आंदोलन के दौरान कई नेताओं के घरों में बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने से यह स्पष्ट होता है कि नेपाल में भारी मात्रा में काला धन मौजूद है। सिंह ने कहा, “जेनजी आंदोलन के बाद आम नागरिकों में यह भावना बढ़ी है कि भ्रष्टाचार और काले धन को समाप्त करने के लिए बड़े मूल्यवर्ग के नोट (₹500 और ₹1000) पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी एक कठोर निर्णय है, जिसे केवल अफवाह के रूप में नहीं बल्कि गहरी मौद्रिक योजना और राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ लागू करना चाहिए।
अर्थशास्त्री प्रा.डा. गोपीलाल न्यौपाने ने नोटबंदी को नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, “अगर 500 और 1000 के नोट बंद किए जाते हैं तो भ्रष्टाचार में कमी आएगी और निष्क्रिय पैसा प्रणाली में वापस आएगा।”

वहीं अर्थशास्त्री नरबहादुर थापा ने विपरीत राय रखते हुए कहा कि 500 के नोट कुल चलन का 19% और 1000 के नोट 59% हिस्सा हैं, इसलिए नोटबंदी से आर्थिक अस्थिरता आ सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि “नोटबंदी के बजाय संपत्ति शुद्धिकरण (Asset Cleansing) पर ध्यान देना चाहिए, जिसके लिए मजबूत और भरोसेमंद सरकार की जरूरत है।”
अर्थशास्त्री प्रा.डा. गोपीलाल न्यौपाने ने नोटबंदी को नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, “अगर 500 और 1000 के नोट बंद किए जाते हैं तो भ्रष्टाचार में कमी आएगी और निष्क्रिय पैसा प्रणाली में वापस आएगा।”
वहीं अर्थशास्त्री नरबहादुर थापा ने विपरीत राय रखते हुए कहा कि 500 के नोट कुल चलन का 19% और 1000 के नोट 59% हिस्सा हैं, इसलिए नोटबंदी से आर्थिक अस्थिरता आ सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि “नोटबंदी के बजाय संपत्ति शुद्धिकरण (Asset Cleansing) पर ध्यान देना चाहिए, जिसके लिए मजबूत और भरोसेमंद सरकार की जरूरत है।”
पूर्व क्याम्पस प्रमुख प्रा.डा. रामप्रताप यादव ने कहा कि नोटबंदी पर विमर्श की शुरुआत स्वागत योग्य है, पर इसके साथ पूरक नीतियाँ और गरीब वर्ग की सुरक्षा भी जरूरी है।
प्रा.डा. रामनन्द प्रसाद साह ने कहा कि नोटबंदी भ्रष्टाचार घटाने और सुशासन लाने की दिशा में एक अच्छी पहल है।
अधिवक्ता जयमंगल प्रसाद जयसवाल ने नोटबंदी से पहले गहन अध्ययन और अनुसंधान की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मनी लॉन्डरिंग, क्रिप्टो करेंसी और अवैध निवेश पर भी जांच होनी चाहिए।
पिछड़ा वर्ग महासंघ के महासचिव सी.एन. खड्गा ने कहा कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार घटेगा और बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा। साथ ही, संपत्ति शुद्धिकरण की प्रक्रिया भी साथ में आगे बढ़नी चाहिए।
वरिष्ठ लेखा निरीक्षक जितन यादव ने कहा कि नोटबंदी से ज्यादा जरूरी है जनचेतना। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का असर सतही रूप में जितना दिखता है, वास्तविकता उससे अलग होती है, इसलिए इसे लागू करने से पहले गहन अध्ययन आवश्यक है।
अनुसंधानकर्मी दीपक गुप्ता ने कहा कि नेपाल की व्यवस्था खुद भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी है, इसलिए व्यापक संपत्ति शुद्धिकरण और वित्तीय सुधार की दिशा में कार्य होना चाहिए।
पूर्व एसपी हजारी प्रसाद जयसवाल ने नोटबंदी के साथ-साथ सम्पत्ति शुद्धिकरण की जांच को भी समानांतर रूप से चलाने की आवश्यकता बताई।
पूर्व अधिकारी गणेश चौधरी ने कहा कि वर्तमान में देश में ब्राह्मण और क्षेत्री समुदायों के बीच वर्गीय टकराव गहराता जा रहा है, इसलिए कल्याणकारी राज्य निर्माण के लिए नोटबंदी से ज्यादा उपयोगी होगा व्यापक संपत्ति शुद्धिकरण।
फोरम की उपाध्यक्ष बिमला भट्टराई ने कहा कि अब तक जितने भी शासक आए, उन्होंने देश को लूटा है, इसलिए अब देश को बचाने और विकास की क्रांति लाने के लिए नोटबंदी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी विशेषज्ञों के सुझावों को संकलित कर फोरम आगे का कार्यक्रम तय करेगा।
कार्यक्रम में प्रा. विजय महासेठ, पिछड़ा वर्ग महासंघ के उपाध्यक्ष राजकुमार चौधरी, दलित अधिकारकर्मी नरेन्द्र पासवान, महेश कलवार, सचिन्द्र यादव, झुमुकलाल यादव, सुकदेव यादव, कैलाश जैन, सीए पुरुषोत्तम कुमार सिंह, संतोषी विश्वकर्मा, इंदिरा शाह आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे और कार्यपत्र की सराहना की।
कार्यक्रम में फोरम की कोषाध्यक्ष रीता कुमारी साह, सह–सचिव शर्मिला गौतम, महासचिव योगनारायण कुमार साह, केन्द्रीय सदस्य कैलाश जैन सहित लगभग 35 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन फोरम के महासचिव योगनारायण साह ने किया, जबकि समापन फोरम के अध्यक्ष मधुरेंद्र चौधरी ने सभी अतिथियों और वक्ताओं को धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया।
