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(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)

अवैध रूप से पानी भरे गड्ढे में डूबकर इंजीनियर युवराज की मौत मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एस आई टी) क्या किसी नतीजे पर पहुंच गई है? नोएडा प्राधिकरण की फिजाओं में चल रही चर्चाओं में एक ही सवाल सभी की जबान पर है,-किस किस पर गाज गिरेगी? ऐसा प्रश्न करने वाले साथ ही जवाब भी दे देते हैं जिसका कोई पुख्ता आधार तो नहीं होता है परंतु सुनने वाले के पास ऐसे जवाबों का कोई जवाब भी नहीं होता है। परंतु लापरवाही और अकर्मण्यता के चलते हुई इस दर्दनाक घटना को लेकर कोई कार्रवाई तो अवश्य होनी चाहिए।उस संभावित कार्रवाई के दायरे में आने वाले लोगों के नाम हर कोई जानना चाहता है। विशेष जांच दल अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपे तो कार्रवाई की राह खुले। ऐसा होने से पहले संभावित कार्रवाई के शिकार होने वाले प्राधिकरण अधिकारियों को कैसे पहचाना जा सकता है? प्राधिकरण के कुछ अधिकारी इस घटना के बाद अत्यधिक विनम्र हो गये हैं। उनके चेहरे पर अनचाही मुस्कान का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। हमेशा भृकुटी ताने और सख्त मिजाज दिखने वाले ये अधिकारी आजकल सामने पड़ते ही कृत्रिम खुशी के साथ मुस्कुराने लगते हैं। इतना ही नहीं बल्कि तपाक से हाथ भी मिलाते हैं। केवल एक अधिकारी ऐसा है जो अपनी गलतियों के पछतावे का भाव लिए घूमता रहता है।हालांकि बताया जा रहा है कि एस आई टी रिपोर्ट पर कार्रवाई होने से पहले संभावित कार्रवाई के दायरे में आने वाले अधिकारियों ने लखनऊ में पहले ही अपने आकाओं से संपर्क साध लिया है। इसके चलते एस आई टी रिपोर्ट पर कार्रवाई में कुछ विलंब भी हो सकता है या सबसे निचले पायदान पर काम करने वाले अधिकारी कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई की औपचारिकता भी पूरी की जा सकती है। एक अधिकारी ने पिछले दिनों निजी मुलाकात में नोएडा प्राधिकरण की शक्ति और महत्व को कुछ इस प्रकार रेखांकित किया था,-यह प्राधिकरण अन्य प्राधिकरणों से बहुत अलग है। इसीलिए यहां कार्यरत अधिकारियों पर आसानी से कार्रवाई नहीं होती है।’ फिर भी कार्रवाई की तलवार लटक तो रही है। एसआईटी की रिपोर्ट की सील खुलने की सभी को प्रतीक्षा है।जो कार्रवाई देखना चाहते हैं उन्हें भी और जो कार्रवाई को धता बताने वाले हैं उन्हें भी।

By Mukesh Seth

Chief Editor

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