★विवेक अग्रवाल★
★मुम्बई★
{गत दिनों एक होटल पर छापामारी कर ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह के सदस्यों को गिरफ्त में लेकर किया था भंडाफोड़, FIR के कुछ ही घण्टों बाद तीनों आरोपियों को छोड़ा}
[पुलिस में गत अप्रैल में होटल पर छापा मारकर सुरेंद्र पंजाबी को पकड़ा,पूछताछ के बाद योगेश मल्होत्रा व हनी रमानी को खार से किया गिरफ्तार]
(करोड़ो का सट्टा ख़िलवाने वाले लोगों को गिरफ़्तारी के कुछ ही घण्टे के बाद छोड़ देना,लोंगो के गले से नही उतर रहा,FIR में भी कुछ धाराओं को नही किया गया है शामिल)
♂÷पालघर जिले के बोईसर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने पिछले दिनों गजब कारनामा अंजाम दिया है। पिछले दिनों एक होटल पर पुलिस दस्ते ने छापामारी करके ऑनलाईन सट्टेबाजों के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया। बाकायदा एफआईआर लिखी लेकिन कुछ ही घंटों में गिरफ्तार किए तीनों बुकियों को रहस्यमय तरीके से रिहा भी कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में पुलिस ने एक शिकायत (सीआर नंबर: 130/2021) गैंबलिंग एक्ट के तहत बोईसर थाने में 12 अप्रैल 2021 को दर्ज की। मामले की जांच बोईसर एलसीबी के पीएसआई आशीष पाटिल को सौंपी गई।
पुलिस दस्ते ने इस मामले में छापा मार कर पहले आरोपी सुरेंद्र पंजाबी को दो मोबाईल फोन और एक नोट बुक के साथ बोईसर स्टेशन रोड पर स्थित होटल महाराजा के कमरा नंबर 207 से 13 अप्रैल 2021 को धर दबोचा। उससे पूछताछ और जांच के बाद दूसरे आरोपी योगी मल्होत्रा उर्फ योगेश मलहोत्रा और तीसरे आरोपी हनी रामानी को मुंबई के उपनगर खार से अगले दिन गिरफ्तार किया।
पता चला है कि तीनों आरोपियों को नामालूम कारणों से पीएसआई ने उसी दिन रिहा कर दिया। सूत्रों का कहना है कि इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत भी हैं। इसके बावजूद तीनों आरोपियों की रहस्यमई रिहाई में भ्रष्टाचार होने की गंध लोग सूंघ रहे हैं।
योगी-हनी क्रिकेट सट्टा खेलने वाला एक मोबाईल एप्लीकेशन वन एक्सचेंज चलाते हैं। इस एप पर 100 रुपए का एक पाईंट होता है। जब कोई खेली इस एप को योगी और हनी से हासिल करता है तो उन्हें कम से कम एक लाख रुपए नकद देने होते हैं। एप हासिल करने के लिए खेली का मोबाईल नंबर लेते हैं। उस मोबाईल नंबर पर एक लिंक योगी और हनी की टेक्निकल टीम एक पासवर्ड के साथ भेजती है। इस लिंक से एप डाऊनलोड करना पड़ता है। उसके बाद पासवर्ड डाल कर एप पर सट्टा लगाया जा सकता है। एप पर यह भी नियम है कि एक बार में कम से कम 10 हजार रुपए याने सौ पाईंट से नीचे का दांव नहीं लगाया जा सकता है।
जब पुलिस ने योगी और हनी को हिरासत में लिया था, तब उनके मोबाईल में 2 से 3 करोड़ रुपयों के लेन-देन और सट्टे की जानकारियां दर्ज थीं।
योगी और हनी के बारे में यह आम है कि दोनों बड़े स्तर के क्रिकेट सट्टा बुकी हैं। योगी-हनी बांद्रा के पाली हिल इलाके में रहते हैं। इनकी खार स्टेशन के पास जेवरात की एक दुकान है, जिसकी आड़ में सारा काला खेल चलता है। यह उनके लिए अवैध रकम लेने और ठिकाने लगाने की आड़ है।
हनी का एक भागीदार दीपक कपूर है। उसे पुलिस ने पकड़ा ही नहीं। योगी-हनी ने पुलिस अधिकारियों को लगभग दर्जन भर बुकियों के नाम, फोन नंबर और जानकारियां पीएसआई आशीष पाटिल को दीं लेकिन उनकी जांच और गिरफ्तारी भी ठंडे बस्ते में चली गई है।
यह खबर भी आ रही है कि पीएसआई आशीष पाटिल ने पूरे मामले की जांच ही अचानक बंद कर दी। कहा जाता है कि योगी-हनी की रिहाई के लिए किसी ताकतवर व्यक्ति का फोन आया था। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या उसी फोन से डर कर दोनों को पुलिस ने रिहा किया है या फिर भ्रष्टाचार हुआ है?
यह भी पता चला है कि आईजी कोंकण रेंज कार्यालय से पीएसआई आशीष पाटिल को नोटिस भेज कर दस्तावेजों के साथ हाजिर होने के लिए आदेश दिए थे। 3 मई 2021 को पीएसआई आशीष पाटिल से आईजी कोंकण ने जवाब-तलब किया। उससे पूछा गया कि आखिरकार इस मामले में टेलीग्राफिक एक्ट के तहत धाराएं क्यों नहीं जोड़ी हैं? इस जांच का परिणाम कुछ नहीं हुआ क्योंकि अब तमाम बुकि भारत से गायब हो चुके हैं।
इस मामले में पुलिस लापरवाही की इंतहा यह भी है कि एप का इस्तेमाल सट्टे के लिए करने के बावजूद आईटी एक्ट 2000 की धाराएं भी नहीं लगाई हैं।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक पुलिस के पंजे से बच कर निकलते ही योगी दुबई भाग गया है। अमूमन योगी-हनी दुबई से ही इस एप का कामकाज चलाते हैं।
सट्टे की दुनिया में इनके बारे में कहा जाता है कि एक मैच पर करोड़ों में सट्टा लगवाते हैं। इनकी बुक लगभग 100 करोड़ की है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क:
संजय मोहिते, आईजी, कोंकण रेंज
दत्तात्रय शिंदे, एसपी, पालघर
प्रकाश गायकवाड़, एडी. एसपी, पालघर
आशीष पाटिल, पीएसआई, एलसीबी, बोईसर






















