(छतरपुर)
सफलता जब ऐतिहासिक गौरव और पारिवारिक संस्कारों की नींव पर खड़ी होती है, तो वह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की उपलब्धि बन जाती है।
मध्य प्रदेश के छतरपुर की प्रतिभाशाली सुपुत्री ने विश्व की अग्रणी तकनीकी संस्था ‘गूगल’ (Google)में चयनित होकर इस बात को चरितार्थ कर दिया है। रक्षा की यह उड़ान बुंदेलखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय है।
रक्षा पहारिया का संबंध उत्तर प्रदेश के कोंच के उस ऐतिहासिक परिवार से है, जिसकी रगों में राष्ट्रभक्ति का प्रवाह रहा है। यह देश का वह अद्वितीय परिवार है, जिसकी तीन पीढ़ियां नमक सत्याग्रह के दौरान एक साथ जेल की सलाखों के पीछे रही थीं। पूर्वजों के उसी संघर्ष और साहस की विरासत को रक्षा ने आज आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर गौरवान्वित किया है।
रक्षा के व्यक्तित्व निर्माण में उनके परिवार की तीन पीढ़ियों का योगदान समाहित है। वे दैनिक जनहित दर्शन’ की संस्थापिका स्व. सुभद्रा देवी पहारिया की परपोती हैं। उनके दादा, जनहित दर्शन के पूर्व संपादक स्व. देवेन्दु पहारिया की बौद्धिक प्रखरता और उनकी दादी स्व. श्रीमती मणि प्रभा पहारिया(सेवानिवृत्त वरिष्ठ अध्यापिका, शासकीय शिक्षा महाविद्यालय) के शैक्षिक मूल्यों ने रक्षा के मार्ग को प्रशस्त किया।
रक्षा के पिता मनेन्दु पहारिया (संपादक, दैनिक जनहित दर्शन) और माता शिप्रा पहारिया (ग्रुप एडिटर, दैनिक जनपथ दर्शन) के सानिध्य में उन्होंने अपनी मेधा को तराशा। रक्षा ने IIEST, कोलकाता जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से कंप्यूटर साइंस एंड टेक्नोलॉजी में बी.टेक की डिग्री प्राप्त कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
रक्षा के सफर में अगस्त 2025 का समय अत्यंत संवेदनशील रहा। 21 अगस्त को उनकी दादी श्रीमती मणि प्रभा पहारिया का देहावसान हुआ। पूरा परिवार शोक संतप्त था, लेकिन दादी के उन सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी रक्षा के कंधों पर थी, जो उन्होंने अपनी पोती के लिए देखे थे। अंतिम संस्कार के ठीक अगले दिन, 22 अगस्त को भारी मन से रक्षा अपनी कर्मभूमि हैदराबाद के लिए रवाना हुईं।
हैदराबाद में प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘वेल्स फ़ार्गो’ (Wells Fargo) में कार्य करते हुए उन्होंने अपनी एकाग्रता और मेहनत को जारी रखा। आज गूगल ज्वाइन करना उनकी उसी तपस्या और अपनी दादी के प्रति उनकी सच्ची श्रद्धांजलि है।
छतरपुर जैसे शहर से निकलकर गूगल जैसी ग्लोबल कंपनी के मुख्यालय तक पहुँचना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी भूगोल की मोहताज नहीं होती। रक्षा पहारिया की यह सफलता उन सभी बेटियों के लिए एक मिसाल है, जो अपनी जड़ों से जुड़कर आसमान छूने का ख्वाब देखती हैं।
पहारिया परिवार की इस गौरवशाली उपलब्धि पर छतरपुर के नागरिक और प्रबुद्ध जन हर्ष व्यक्त कर रहे हैं। रक्षा की यह सफलता निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों को निरंतर आगे बढ़ने का हौसला देगी।


