लेखक-डॉ.के. विक्रम राव राजनेताओं को भारतीय इतिहास का ज्ञान कभी भी पर्याप्त नहीं रहा। सुनी सुनाई बात को तूल देकर वे ऐतिहासिक असत्य को तर्क के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण ह... Read more
लेखक -डॉ.के. विक्रम राव सार्वभौम गणराज्य बांग्लादेश की स्वर्णजयंती (26 मार्च 2025) पर कई अनबूझे, पुराने प्रश्न उभरते हैं। उत्तर खोजते हैं। हल तलाशते हैं। मसलन अखण्ड भारत में जिस भूमि पर लाखो... Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव कांग्रेस को इतने दशक हो गए फिर भी न ढांचा बदला न नेतृत्व। वैसा ही है जैसा नवम्बर 1978 में था। एक सियासी आँधी आयी थी। रायबरेली में जख्मी होकर, इंदिरा गांधी चिकमगलूर (कर... Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव “बहुगुणा भाई बहुगुणा शास्त्रीय जी का झुनझुना”। ऐसी काव्यात्मक श्रद्धांजलि “नवभारत टाइम्स” के संवाददाता और मेरे साथी स्व. सुरेंद्र चतुर्वेदी द्व... Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव सोचिए यदि टेलीफोन न होता तो ? दुनिया दूरियों में खो जाती। पृथकता गहराती। फासले लंबाते। मानवता बस चिंदी चिंदी ही रह जाती। मगर आज ही के दिन (10 मार्च) ठीक 149 साल पूर्व... Read more
लेखक- डॉ.के. विक्रम राव ( √ 64 वीं पुण्यतिथि पर विशेष! 9 नवम्बर 1896 – 9 मार्च 1961) प्रख्यात संपादक, जानेमाने स्वाधीनता-सेनानी और प्रथम संसद (राज्य सभा) के सदस्य (1952), श्री कोटमराजू... Read more
लेखक- डॉ.के. विक्रम राव प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की गत सप्ताह पुण्यतिथि (28 फरवरी 1963) थी। इस संदर्भ में प्रथम राष्ट्रपति और प्रथम प्रधानमंत्री के बीच चला सत्ता संघर्ष का विश्ले... Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव अगर कार्ल मार्क्स ने औघड़, राख रचाये, बाघचर्मधारी, अर्धनग्न, श्मशानवासी अनासक्त वैरागी महादेव की मात्र फोटो देख ली होती तो वे कभी न लिखते कि आस्था या अकीदा आमजन का अफीम... Read more
असली गाँधी थे बादशाह खान लेखक- डॉ.के. विक्रम राव आजकल भारत में हो रहे फसाद के परिवेश में खान अब्दुल गफ्फार खान बहुत याद आते हैं| वे इन दोनों विषम आस्थावालों की एकता के प्रतीक थे| खुदगर्ज मुस... Read more
लेखक-डॉ.के. विक्रम राव सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को “बेचारी” बताया क्योंकि वे संसद में अपना संबोधन ठीक से कर नहीं पाईं। इस शब्द बेचारी (अंग्रेजी में पुवर-लेडी) के... Read more


















