★मुकेश शर्मा★
★भोपाल★
{अहम सवाल – पिता बाथम स्वयं और संतान मांझी कैसे}
[गेंदा लाल कई मंत्रियों का रहा है ख़ास,SDM ने कहा तत्कालीन SDM ने जो जाति प्रमाण पत्र जारी किया वो सही होगा]
(अवैध जाति प्रमाण पत्र के द्वारा आरक्षण प्राप्त कर पदस्थ हुए जेल प्रहरी)
♂÷ मध्य प्रदेश शासन के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर के निज सचिव गेंदालाल मांझी पर असलियत छुपाकर जाति प्रमाण पत्र बनवाने एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने के आरोप लगाए गए हैं इसका शिकायती आवेदन तैयार कर जेल अधीक्षक ग्वालियर, पुलिस महानिदेशक भोपाल एवं मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन की ओर भेजा गया है ।
दरअसल जी एल मांझी के पिता गोविंद दास तथा उनकी माता की जाति आज भी बाथम है, जिसे समझने के लिए बहुत ज्यादा जहमत उठाने की भी जरूरत नहीं है केवल विधानसभा 15 की वोटर सूची एवं उनकी समग्र आईडी का अवलोकन करने मात्र से पता लगाया जा सकता है।इसके अलावा मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी परिपत्र में बाथम जाति पिछड़े वर्ग की सूची में 12 नम्बर है और मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति संशोधित अधिनियम 2000 के परिपत्र में मांझी जाती 29 वेननम्बर पर आती है। अब गेंदालाल मांझी पिछड़ावर्ग में आते हैं या अनुसूचित जनजाति में यह संदेह और जांच दोनों का विषय है!
हमारे लोकतंत्र के वट बृक्ष में भ्रष्टाचार की दीमक और आरक्षण का दंश तो स्वतंत्र भारत की पहली सरकार के समय से ही चला आ रहा है जिसे भीमराव अंबेडकर के संविधान की आड़ में निरन्तर समय-समय पर पोषित किया जाता रहा है ! किन्तु क्या आरक्षण का लाभ कभी किसी वास्तविक हितग्राही को मिला ?
अवैध जाति प्रमाण पत्र के आधार पर पद स्थापित होकर नौकरी कर रहे गैंदालाल मांझी मूलतः जेल विभाग में जेल प्रहरी के पद पर पदस्थ हैं किन्तु नेताओं की तीमारदारी से बनाई पहुंच के कारण खाकी से दूर खादी के इर्द-गिर्द ग्लेमर वाली लाइफ स्टाइल के आदी हो गए।
सूत्रों की मानें तो मांझी द्वारा अवैध नियुक्ति का लाभ वर्ष 2007 से लिया जा रहा है !
इस दौरान वह अभी तक नारायण सिंह कुशवाह, लाल सिंह आर्य जैसे कद्दावर मंत्रियों के निज सहायक या सचिव भी रह चुके हैं ! और विभिन्न मंत्रियों से बने संबंधों से अपने रसूख के बल पर अभी तक पदस्थ हैं ! उक्त अवैध नियुक्ति की शिकायतें शिकायत कर्ताओं द्वारा उच्चाधिकारी और शासन की ओर भेजकर विधिवत जांच कर उचित कार्यवाई की मांग की गई है ! शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के साथ गेंदालाल मांझी के दस्तावेजों के साथ उन शासकीय साक्ष्यों को भी संलग्न किया गया है जो जाति छुपाकर लाभ लेने की ओर साफ इशारा करते हैं।
उल्लेखनीय है कि संशोधित शासकीय सेवा नियम के अनुसार इस प्रकार के आरोपी किसी भी मंत्री एवं विधायक के निजी सचिव रहकर कार्य नहीं कर सकते हैं ।
अब देखना यह है कि जाति छुपाकर पद और रसूख का लाभ उठाने वाले के खिलाफ शासन क्या कदम उठाता है ।
इनका कहना है
काफी ना नुकुर के बाद एसडीएम ने कहा कि बाथम किस वर्ग में आते हैं पता नहीं पर तत्कालीन एसडीएम ने जो जाति प्रमाण पत्र जारी किया है वो सही होगा!वही जाति मानी जायेगी।
प्रदीप तोमर
एसडीएम ग्वालियर






















