★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{पौने दो साल पहले धारा 370-35A को लेकर काँग्रेस के स्टैण्ड से नाराज होकर छोड़ा था हाथ का साथ कद्दावर नेता ने तो कई बार अपनी उपेक्षा से भी रहे नाराज़}
[कभी गाँधी परिवार के विश्वासपात्र रहे कृपाशंकर सिंह के नेतृत्व में मुम्बई की लगभग सभी चुनावों में जीत हासिल करने वाली काँग्रेस में राहुल गाँधी ने श्री सिंह को साइडलाइन कर मुम्बई महाराष्ट्र में बिहारी नेतृत्व संजय निरुपम को बनाया था मुम्बई अध्यक्ष]
(काँग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार में विलासराव देशमुख को मुख्यमंत्री बनवाने में कृपाशंकर सिंह की बड़ी भूमिका मानी जाती रही,उसी सरकार में बने गृहराज्य मन्त्री)
[सिंह को सदस्यता ग्रहण प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कराया तो मौके पर मौजूद रहे देवेंद्र फडणवीस, प्रवीण दरेकर,रीता बहुगुणा जोशी,पूनम महाजन,मंगल प्रभात लोढ़ा, विधा ठाकुर आदि]
♂÷कभी देश की सियासत व सत्ता को छह दशक से ऊपर अपनी उंगलियों पर नचाने वाली सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के लिए आज महाराष्ट्र मुंबई से काफी सदमा जनक राजनीतिक दिन रहा,जब उनके कद्दावर उत्तर भारतीय नेता वह पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह ने करीब पौने दो साल बाद के पश्चात कमल दल का भगवा झंडा थाम लिया।जिससे इतना तो तय है भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं एक आगामी दिनों में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव में कभी उत्तर भारतीयों की पहली पसंद रहे कांग्रेस को उन्हीं के तुरूप के इक्के कृपाशंकर सिंह के जरिए पटखनी देना और दूसरा विधानसभा चुनाव में मुंबई समेत महाराष्ट्र भर में उत्तर भारतीय लोगों के क्षत्रप नेता के तौर पर प्रस्तुत कर उत्तर भारतीयों को एक मुश्त अपने पाले में खींच लाना जिससे सत्ता का सिंहासन उससे दूर ना हो पाए।

मालूम हो कि आज बुधवार को दिन में 12:00 बजे महाराष्ट्र भाजपा के केंद्रीय कार्यालय पर पूर्व गृह राज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष व विधायक चंद्रकांत दादा पाटील, नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नेता,प्रतिपक्ष विधान परिषद प्रवीण दरेकर, विधायक और पूर्व मंत्री विद्या ठाकुर,सांसद पूनम महाजन, सांसद रीता बहुगुणा जोशी,विधायक व मुंबई अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा समेत तमाम दिग्गज बीजेपी नेता श्री सिंह के भाजपा प्रवेश के दौरान उपस्थित रहे।
याद होगा कि कृपाशंकर सिंह महाराष्ट्र खासकर मुंबई में उत्तर भारतीयों को कांग्रेस से जुड़े रहने में सर्वाधिक बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं जिसका परिणाम रहा है कि गांधी परिवार के यह काफी विश्वासपात्र माने जाते थे। कहा तो यहां तक जाता था कि जब महाराष्ट्र में काँग्रेस एनसीपी गठबंधन के साथ कांग्रेस के विलासराव देशमुख के नेतृत्व में सरकार बनी तो विलासराव देशमुख को मुख्यमंत्री बनवाने में कृपाशंकर सिंह की भी भूमिका बड़ी मानी जाती रही है।उसको इससे समझा जाता है कि मुख्यमंत्री के बाद गृहराज्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद को कृपाशंकर सिंह को दिया गया जिसका इन्होंने बखूबी अंजाम दिया और इनके कार्यकाल के दौरान मुंबई व महाराष्ट्र की पुलिस का काफ़ी अत्याधुनिकीकरण उस दौरान हुआ और साथ ही मुंबई से अंडरवर्ल्ड का सफाया करने में भी इनका बड़ा योगदान माना जाता है।
कांग्रेसका मोहभंग होने में यह कहा जाता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी प्रियंका गांधी की अपेक्षा राहुल गांधी इनको कम तवज्जो देते रहे।राहुल गाँधी ने उत्तरभारतीय नेता श्री सिंह को मुंबई अध्यक्ष पद से हटाकर बिहारी नेतृत्व संजय निरुपम को आगे बढ़ाने लगे,जिससे दूरी बढ़ने लगी हालांकि यह कहने में कोई गुरेज नही कि कृपाशंकर सिंह के मुम्बई अध्यक्ष रहते मुम्बई की लगभग सभी सीटे व विधानसभा की अधिकतर सीटे काँग्रेस ने फ़तह की थी,जबकि संजय निरुपम के नेतृत्व में काँग्रेस फुस्स साबित हुई।दूसरी वजह यह भी माने जाते हैं कि यह पूर्व केंद्रीय मंत्री गुरुदास कामत की मौत के बाद उन्हीं की सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे जिसके बाद भी उनको राहुल गांधी ने चुनावी टिकट नहीं दिया जिस से दूरी बढ़ते चले गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लगभग 2 वर्ष पूर्व जब जम्मू और कश्मीर से धारा 370 और 35A को हटाया गया तो इन्होंने काँग्रेस के स्टैंड के विरुद्ध जाकर भारत सरकार और प्रधानमंत्री की तारीफ की और कुछ दिनों बाद इन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया।अब लगभग 22 महीने के बाद बीएमसी चुनाव के पूर्व बीजेपी ने इस कद्दावर नेता को भगवा झंडा थमा उत्तर भारतीयों के साथ ही मुंबई महाराष्ट्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में पैर बढ़ा दिए हैं।






















