★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{अनुच्छेद 370 व 35A ख़त्म होने से अलगाववादी ताकतें हैं घाटी से नदारद कहा जम्मू-कश्मीर के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ निर्मल सिंह ने}
[दीप कमल फाउंडेशन द्वारा डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन संघर्ष पर लिखी गयी पुस्तक “राष्ट्र चेतना” का विमोचन पूर्व मुख्यमंत्री के हाथों किया गया]
(विमोचन समारोह में बीजेपी नेता चंद्रकांत दादा पाटिल,आशीष शेलार,मंगल प्रभात लोढ़ा कार्यक्रम संयोजक व दीपकमल फाउंडेशन के अमरजीत मिश्र मौजूद रहे)
♂÷जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने आजादी के बाद देश की एकता और अखंडता को लेकर जम्मू-कश्मीर में बिगड़ती स्थिति को ठीक करने के लिए तात्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला से कई बार बातचीत की थी,उन्हें समझाने का प्रयास किया था । इसके अलावा और भी कई तरह के प्रयास किये थे।ये सारे प्रयास विफल होने के बाद उन्होने आन्दोलन का रास्ता अख्तियार किया और अपने प्राणों की बाजी लगाकर जम्मू कश्मीर से परमिट सिस्टम खत्म करवाया था।यह उदगार जम्मू-कश्मीर के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ निर्मल सिंह ने व्यक्त किये।वे मुंबई में पूर्व राज्यमंत्री अमरजीत मिश्र की संस्था दीप-कमल फाउंडेशन द्वारा डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे।उन्होने कहा कि उसी तरह भाजपा ने भी घाटी में चल रहे विघटनकारी शक्तियों को समझाने और उन्हें मुख्य धारा में लाने की बहुत कोशिश की।अनुच्छेद 370 व 35 ए हटाने से पहले भाजपा ने पीडीपी के साथ सरकार बना के भी शान्ति बहाली की कोशिश की।अंत में इस विशेष दर्जे को समाप्त करने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखा।जम्मू कश्मीर के नेता डॉ सिंह ने बदलते जम्मू कश्मीर की तस्वीर का खाका भी खिंचा।डॉ सिंह ने कहा कि घाटी में आज पत्थरबाज व अलगाववादी नदारद हैं,विघटनकारियों के हौसले पस्त हैं और उग्रवाद की बात करने वालों का अता पता नहीं है।
महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा कि यह सच है कि तुष्टिकरण की नीतियों की वजह से कॉंग्रेस के नेताओं ने कश्मीर को अलग राज्य का दर्जा देकर सत्ता के स्वार्थ में भारत माता के भाल पर एक गहरा जख्म दे दिया था,तब राष्ट्रवाद के अमर हुतात्मा व हिंदुत्व की सांस्कृतिक एकता के सबसे बड़े हिमायती डॉ मुखर्जी ने कहा कि एक देश मे दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नही चलेंगे,कहकर अपना बलिदान दिया। आज देश के प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 को खत्म करके उस जख्म की शल्य क्रिया कर दी है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पैरोकार डॉ मुखर्जी की जयंती पर बसंत स्मृति सभागार दादर में उन्हें याद किया गया ।स्मृति चिन्ह देकर डॉ निर्मल सिंह का सम्मान पूर्व मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने किया।
विशेष अतिथि विधायक व पूर्वमंत्री आशीष शेलार ने कहा कि डॉ मुखर्जी की वजह से पंजाब,पश्चिम बंगाल व जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बन पाया,उनके त्याग व शहादत को हम कभी नहीं भूलेंगे । मुंबई भाजपा अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा ने भी डॉ मुखर्जी को याद किया।
समारोह के संयोजक व मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र ने इतिहास की किताबों में डॉ मुखर्जी की शहादत का उल्लेख न होने पर अपना क्षोभ व्यक्त किया और कहा कि इतिहास की किताब में गांधीजी की बकरी का भी महिमामंडन किया गया है ,पर देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए अपनी शहादत देनेवाले डॉ मुखर्जी का जिक्र नहीं किया गया।उन्होने फिर से इतिहास लिखे जाने की जरुरत बताई।
दीप कमल फाउंडेशन द्वारा डॉ मुखर्जी के जीवन संघर्ष पर प्रकाशित एक पुस्तक “राष्ट्र – चेतना” का विमोचन जम्मू कश्मीर के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ निर्मल सिंह के हाथों हुआ।कोविड संक्रमण काल में अपने अभिभावक खो चुके 50 बच्चों की स्कूल फीस देने का जिम्मा फाउंडेशन ने उठाया है।बच्चो की फीस का चेक भी अतिथियों ने वितरित किया।समारोह का संचालन संतोष केलकर ने किया।






















