★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{समाचार एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करने वाले 39 वर्षीय दानिश सिद्दीकी प्रेस फोटोग्राफी के लिए थे अफगानिस्तान के स्पिन बोल्डक इलाक़े में जब उनकी हत्या हुई}
[रिपोर्ट में कहा गया कि जिस मस्ज़िद में थे सिद्दीकी वहाँ सिर्फ़ इसलिए ही हमला किया गया कि भारतीय प्रेस फोटोग्राफर है]
(तालिबान लड़ाकों ने पुष्टि करने के बाद पहले सिर पर गोली मारते हुए किया था गोलियों से छलनी,दानिश को मिला था पुलित्जर पुरस्कार)
♂÷तालिबान ने भारतीय फ़ोटो पत्रकार दानिश सिद्दीक़ी की पहचान करने के बाद उनकी ‘बर्बतापूर्वक’ हत्या की थी.
अमेरिकी समाचार पत्रिका ‘वॉशिंगटन एग्ज़ामिनर’ ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है.
पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक़ पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित सिद्दीक़ी की मौत महज अफ़गान सेना और तालिबान के बीच हुए संघर्ष में नहीं हुई थी बल्कि तालिबान ने उनकी मौत को बाक़ायदा अंज़ाम दिया था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करने वाले 39 वर्षीय दानिश सिद्दीक़ी रिपोर्टिंग के लिए अफ़गानिस्तान में थे जब कंधार के स्पिन बोल्डक इलाके में उनकी मौत हो गई.
शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि दानिश की मौत अफ़गान सेना और तालिबान के बीच संघर्ष में हुई.
तालिबान ने एक बयान जारी कर उनकी मौत में अपना हाथ होने से इंकार भी किया था.
तालिबान ने कहा था, “हमें भारतीय पत्रकार की मौत का खेद है. इस इलाके में रिपोर्टिंग के लिए आने वाले पत्रकार हमें सूचित करें और हम उनका ख़याल रखेंगे.”
‘मस्जिद पर सिर्फ़ इसलिए हमला क्योंकि सिद्दीक़ी वहाँ थे’
अब वॉशिंगटन एग्ज़ामिनर की रिपोर्ट तालिबान के दावों को ग़लत साबित कर रही है.
रिपोर्ट के अनुसार दानिश सिद्दीक़ी अफ़गान सेना के साथ स्पिन बोल्डक इलाके में तालिबान-अफ़गान संघर्ष कवर करने गए थे. स्पिन बोल्डक इलाके पर तालिबान का क़ब्ज़ा है.
रिपोर्ट के अनुसार “जब अफ़गान सेना और दानिश एक कस्टम पोस्ट से थोड़ी ही दूर थे तभी उन पर तालिबान का हमला हुआ और अफ़गान सेना को दो टुकड़ियों में बंटना पड़ा. इस दौरान अफ़गान सेना के कमांडर और कुछ सैनिक दानिश से अलग हो गए.”
वॉशिंगटन एग्ज़ामिनर के अनुसार इस बीच गोलीबारी में दानिश सिद्दीक़ी घायल हो गए और उन्हें प्राथमिक उपचार देने के लिए एक स्थानीय मस्जिद में ले जाया गया.
जैसे ही पता चला कि सिद्दीक़ी को मस्जिद में ले जाया गया है, तालिबान ने मस्जिद पर हमला कर दिया.
रिपोर्ट में स्थानीय जाँच के हवाले से लिखा गया है कि तालिबान ने मस्जिद पर सिर्फ़ इसलिए हमला किया क्योंकि सिद्दीक़ी वहाँ थे.
रिपोर्ट के मुताबिक़ “तालिबान ने जब सिद्दीक़ी को जब पकड़ा तब वो ज़िंदा थे. तालिबान लड़कों ने पहले उनकी पहचान की पुष्टि की और फिर उन्हें गोली मारी.”
‘पहले सिर पर मारा फिर गोलियों से शरीर छलनी किया’
अमेरिकन एंटरप्राइज़ इंस्टिट्यूट के वरिष्ठ फ़ेलो माइकल रुबिन के मुताबिक़ “सिद्दीक़ी की मौत के बाद उनकी जो तस्वीरें सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुईं उनमें उनका चेहरा साफ़ पहचान में रहा है. मैंने भारत सरकार के एक सूत्र से मिले सिद्दीक़ी की कुछ और तस्वीरों और एक वीडियो की समीक्षा की.”
रुबिन ने लिखा है, “वीडियो में मैंने देखा कि तालिबान के लड़ाकों ने पहले सिद्दीक़ी के सिर पर खूब मारा और फिर गोलियों से उनका शरीर छलनी कर दिया.”
रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान ने जिस तरह सिद्दीक़ी को निशाना बनाकर उनकी हत्या की और गोलियों से उनका शरीर छलनी किया उससे पता चलता है कि युद्ध के अंतर्राष्ट्रीय नियमों की ज़रा भी परवाह नहीं करता.
दानिश सिद्दीक़ी अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के चीफ़ फ़ोटो पत्रकार थे और वो अफ़ग़ानिस्तान में जारी संघर्ष और तनाव को लगातार कवर कर रहे थे.
वो अपने ट्विटर अकाउंट पर लगातार वहाँ की स्थिति का ब्योरा दे रहे थे. सिद्दीक़ी ने बताया था कि कैसे एक हमले में वो बाल-बाल बचे थे.
दानिश सिद्दीक़ी और उनकी टीम को रोहिंग्या शरणार्थी संकट की कवरेज के लिए फीचर फोटोग्राफी कैटगिरी में साल 2018 के पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ की जंग के अलावा कोरोना महामारी, नेपाल भूकंप और हॉन्ग-कॉन्ग के विरोध प्रदर्शनों को कवर किया था, जिसे ख़ूब तारीफ़ मिली थी।






















