★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{अमेरिका की जिम्नास्टिका सिमोन बैएल्स 6 बार की मेडलिस्ट व टोक्यो ओलंपिक में जीत चुकी थी सिल्वर,खेलना था गोल्ड मेडल के लिए}
[सिमोन ने कहा कि वह मानसिक रूप से आगे खेलने के लिए फ़िट नही है और वह गेम से हट रही है, माइकल फेल्प्स,सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली,दीपिका पादुकोण, हनी सिंह भी हो चुके हैं डिप्रेशन के शिकार]
(शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वस्थ रहना खुशहाल व कामयाब जीवन के लिए बेहद जरूरी=डॉ.एमएन त्रिपाठी)
♂÷अमेरिका की छह बार की मेडलिस्ट रही जिमनास्टिका सिमोन बैएल्स ने टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद आगे फ़ाइनल राउण्ड(गोल्ड मेडल) के लिए यह कह कर सारी दुनियां को स्तब्ध कर दिया कि वह मानसिक तौर पर ख़ुद को फ़िट नही महसूस कर रही है।सिमोन के इस बड़े क़दम से एक बार फिर मानव जीवन मे डिप्रेशन(अवसाद) यानी मानसिक स्वास्थ्य की बड़ी भूमिका को लेकर बहस शुरू हो चुकी है।

इस बाबत प्रख्यात मनोचिकित्सक डॉ. एमएन त्रिपाठी कहते हैं कि मेंटली अनफिट के दौरान खिलाड़ी अगर स्पर्धा में भाग लेते हैं तो खिलाड़ी भवनात्मक मनोदशा के चलते ख़ुद को ख़तरे में डाल सकता है, खेल के दौरान शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य का तालमेल होना ज़रूरी है तभी आप जीतने पर ख़ुश होंगे।
डॉ.त्रिपाठी ने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका के महान तैराक माइकल फेल्प्स,सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली,हनी सिंह आदि ने भी मानसिक स्वास्थ्य की परेशानियों से जूझें और डिप्रेशन को मात दी।
उन्होंने आगे कहा कि बॉलीवुड की दीपिका पादुकोण, अनुष्का शर्मा, श्रद्धा कपूर समेत तमाम लोग असफलता के चलते एक दौर में डिप्रेशन में चले गए थे किंतु मनोचिकित्सक की सलाह पर उचित इलाज़ के बूते आज सामान्य जिंदगी जी रहे हैं, जबकि वहीँ आये दिन ऐसा भी देखा व सुना जाता है कि लोग फाँसी लगाकर,गोली मारकर, ज़हर ख़ाकर आत्महत्या कर लेते हैं।
मनोचिकित्सक ने कहा कि जो डिप्रेशन में चले जाते हैं उनके लक्षण होते हैं कि वह धीरे-धीरे घर परिवार समाज से कटना शुरू कर देते हैं, गुमसुम रहते हैं कम बोलते हैं और उनका आत्मविश्वास क्षीण होते जाता हैं।
ऐसे लोगों को लगता है कि वह सफ़ल नहीं हो पाएंगे,उनकी कोई परवाह नही करता,आदि आदि नकारात्मक विचार व बाते करते हैं।
इस तरह के लक्षणों वाले लोगों पर विशेष ध्यान रखे क्योंकि हो सकता है कि वह डिप्रेशन का शिकार हो चुका हो,इनसे सहानुभूति पूर्वक बातें करें और इनको अकेला न छोड़े।
किसी अच्छे मनोचिकित्सक को दिखाए जिससे वक़्त रहते इनका इलाज़ हो सके और यह सामान्य जिंदगी जी सके।
डॉ.एमएन त्रिपाठी ने आगे कहा कि गाँवो देहातों में मानसिक रोगियों का मनोचिकित्सक के यहाँ इलाज़ कराने के बजाय भूत प्रेत ऊपरी हवा कहकर कथित ओझा तांत्रिकों के मकड़जाल में फँसकर धन व जन की हानि उठानी पड़ती है और वह पीड़ित पूरी तरह से पागल तक हो जाते हैं, जबकि ऐसे लोगों को तुरंत मनोचिकित्सक के पास ले जाकर बेहतर इलाज़ के बूते ठीक किया जा सकता है जिससे वह अपनी सामान्य व खुशहाल जिंदगी जी सके।






















